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Tag: सत्ता की जवाबदेही

राममनोहर लोहिया और नेहरू: लोकसभा में “तीन आना बनाम पंद्रह आना” की ऐतिहासिक बहस

1963 में लोकसभा में डॉ. राममनोहर लोहिया द्वारा प्रधानमंत्री नेहरू के सरकारी खर्चों पर की गई "तीन आना बनाम पंद्रह आना" बहस ने देश में गहराई से व्याप्त गरीबी और सत्ता की विलासिता के बीच की खाई को उजागर किया। यह ऐतिहासिक भाषण न केवल तत्कालीन सरकार की आलोचना था, बल्कि भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय, समानता और जवाबदेही के पक्ष में एक साहसिक हस्तक्षेप भी था।